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Year Ender: थोड़ा है बहुत कुछ की जरूरत है...भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिए कैसा रहा साल 2023

US-India Relations: फैक्ट यह है कि एक तरफ तो अमेरिका कथित साजिश पर चार्जशीट के साथ अदालती कार्यवाही की तरफ बढ़ गया जबकि सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमले के लिए जिम्मेदार लोगों और अमेरिका में शीर्ष भारतीय राजनयिकों को खुले तौर पर धमकियां मिलने के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

Year Ender: थोड़ा है बहुत कुछ की जरूरत है...भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिए कैसा रहा साल 2023
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Rachit Kumar|Updated: Dec 24, 2023, 06:35 PM IST

भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिए साल 2023 ऐतिहासिक साबित हुआ. दोनों देशों के रिश्तों के लिए यह साल मजबूती लेकर आया. 2023 में ही पीएम मोदी अमेरिका के राजकीय दौरे पर गए और फिर जी-20 में शामिल होने के लिए जो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भारत आए. हालांकि, साल का अंत एक निराशाजनक घटना के साथ हुआ, जब बाइडेन प्रशासन ने न्यूयॉर्क की अदालत में एक अमेरिकी नागरिक को अपनी धरती पर एक अलगाववादी सिख नेता की हत्या की साजिश रचने के लिए एक भारतीय अधिकारी का नाम लेते हुए चार्जशीट दाखिल की. 

फैक्ट यह है कि एक तरफ तो अमेरिका कथित साजिश पर चार्जशीट के साथ अदालती कार्यवाही की तरफ बढ़ गया जबकि सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमले के लिए जिम्मेदार लोगों और अमेरिका में शीर्ष भारतीय राजनयिकों को खुले तौर पर धमकियां मिलने के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. यह साफ दिखाता है कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच भरोसे की बात आती है तो बहुत कुछ करने की जरूरत है. 

दोनों देशों के बीच सुधरे संबंध

साल 2023 में, मोदी और बाइडेन दोनों ने कई कोशिशें कीं. कई ऐसे कदम उठाए जिनका मकसद दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद पार्टनरशिप बनाना था. इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने क्रिटिकल एंड इमरजेंसी टेक्नोलॉजी (आईसीईटी) की शुरुआत के लिए NSA अजीत डोभाल की अगुआई में अपना डेलिगेशन भेजने से की. आईसीईटी, अमेरिका-भारत साझेदारी में एक बड़ा मील का पत्थर है, जिसे स्ट्रैटजिक सिक्योरिटी एंड टेक्नोलॉजी कॉपरेशन के तहत अहम माना जा रहा है. 

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है. भारत सरकार अमेरिकी कंपनियों को देश में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने और अपनी मौजूदगी बढ़ाने की सुविधा के लिए कई कदम उठा रही है. दूसरी ओर, बाइडेन ने न केवल भारत के साथ जेट इंजन मैन्युफैक्चरिंग सौदे को मंजूरी दी, बल्कि भारत के लिए निर्यात नियंत्रण नियमों में ढील देने के लिए कई प्रशासनिक कदम भी उठाए.

 रिश्तों को और मजबूत करने के लिए बाइडेन ने जून में पीएम मोदी को राजकीय दौरे के लिए अमेरिका बुलाया. बाइडेन ने न केवल व्हाइट हाउस के लॉन को रिकॉर्ड 15,000 भारतीय अमेरिकियों के लिए खोला, बल्कि उनके साथ आठ घंटे से ज्यादा वक्त बिताया. इसके बाद 100 दिनों से भी कम समय में अमेरिकी राष्ट्रपति सितंबर में जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे. 

जी-20 में आए थे बाइडेन

ऐसे समय में जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध पर बुरी तरह विभाजित थी और चीन-रूस के नेता जी-20 में भाग नहीं ले रहे थे, बाइडेन ने तय किया कि जी-20 शिखर सम्मेलन सफल रहे. इस साल टॉप अमेरिकी अधिकारी जैसे वित्त मंत्री जेनेट येलेन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी भारत आए.

वहीं, भारत ने बोइंग से कमर्शियल विमान खरीदने के अरबों डॉलर के ऐतिहासिक सौदे को हरी झंडी देने से लेकर लंबे समय से पेडिंग ड्रोन सौदे को मंजूरी देने तक समान स्तर पर प्रतिक्रिया दी. अक्टूबर तक, ऐसा लगा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र अब भरोसेमंद भागीदार हैं. 

इन घटनाओं से दिखी भरोसे की कमी

इस सब के बीच साल की आखिर तिमाही में दो घटनाओं से मालूम चलता है कि अभी भी इसे भरोसेमंद साझेदारी नहीं कहा जा सकता. पहली घटना में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार और खालिस्तान समर्थक अलगाववादी की हत्या के बीच संभावित संबंध के बारे में लगाए गए आरोपों को खुला अमेरिकी समर्थन था. 

दूसरी घटना के तहत, कनाडा के आरोपों के 100 दिनों से भी कम समय में, न्याय विभाग ने न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में केस दायर किया और अमेरिकी धरती पर एक अमेरिकी नागरिक को मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया है. अलगाववादी सिख नेता का नाम नहीं बताया गया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में उसकी पहचान सिख फॉर जस्टिस के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू के रूप में की गई है. भारत ने कनाडाई आरोपों से इनकार किया है और बार-बार कहा है कि कनाडा ने मामले पर सबूत साझा नहीं किए हैं.

(पीटीआई इनपुट के साथ)

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