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Paush Purnima 2024: पौष पूर्णिमा के दिन पूजा के समय जरूर करें ये काम, सभी समस्याएं हो जाएंगी छूमंतर

Paush Purnima Vrat Katha: सनातन धर्म में कोई भी व्रत या उपवास का फल तभी प्राप्त होता है, जब उसे विधिपूर्वक रखा जाए. बता दें कि व्रत के दौरान कथा पढ़ने से हर मनोकामना पूर्ण होती है. पौष पूर्णिमा के समय कथा अवश्य पढ़ें, सुनें. 

 
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shilpa jain|Updated: Jan 25, 2024, 07:31 AM IST

Purnima Vrat Katha In Hindi: पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पौष पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. हिंदू धर्म में इसका खास महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करना और दान आदि करने से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार 25 जनवरी 2024 गुरुवार के दिन पौष पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा.  इस दिन उपवास रखकर भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से विशेष लाभ होता है और व्यक्ति की जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं.    

पौष पूर्णिमा शुभ मुहूर्त 

पौष माह की पूर्णिमा तिथि इस बार 24 जनवरी 2024 को रात 09 बजकर 49 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं 25 जनवरी रात्रि 11 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में इस दिन पौष पूर्णिमा 25 जनवरी गुरुवार के दिन मनाई जाएगी. 

पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा का महत्व

सनातन धर्म में किसी भी व्रत और उपवास का फल तभी मिलता है, जब विधिपूर्वक व्रत कथा की जाए. पौष पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ने और सुनने की परंपरा है. इससे साधक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. बता दें कि सत्यनारायण की कथा पढ़ने से व्यक्ति को कई सीख मिलती हैं. जैसे अपना संकल्प कभी नहीं भूलें और कभी भी भगवान के प्रसाद का अपमान न करें.

जरूर करें ये कार्य 

अगर आप पूर्णिमा तिथि का व्रत रख रहे हैं, तो साधक को इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाना चाहिए. इसके बाद चौकी पर सत्यनारायण भगवान की तस्वीर और  कलश रखकर शुभ मुहूर्त में पूजन करें. इस दौरान इस बात का ध्यान रखें कि आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. शाम के समय सत्यनरायण भगवान की कथा का श्रवण करें. इसके बाद सत्यनारायण भगवान को चरणामृत, पान, तिल, रोली, कुमकुम, फल, फूल, सुपारी और दूर्वा आदि अर्पित करें. आखिर में लोगों में कथा का प्रसाद बांटें. 

पूर्णिमा तिथि पर करें ऐसा 

ज्योतिष शास्त्र में पूर्णिमा के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का अभिषेक करना ज्यादा अच्छा माना गया है. अभिषेक के बाद भगवान विष्णु को नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से श्रृंगार करें. इसके बाद मंदिर में धूप-दीप जलाएं और ऊँ नमों भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. आखिर में मिठाई का भोग लगाएं और मां लक्ष्मी-विष्णु भगवान की आरती करें.

 

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