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गंभीर बीमारियों को कवर करती हैं कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी, इसमें निवेश करके खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

Health Insurance: एक बढ़िया हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ खुद को सुरक्षित रखना जरूरी है. आज हम आपको कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में जानकारी दे रहे हैं. ये आपको और फैमिली को मेडिकल इमरेजेंसी के दौरान होने वाली वित्तीय परेशानी से बचाएगी

गंभीर बीमारियों को कवर करती हैं कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी, इसमें निवेश करके खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
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Arti Azad|Updated: Apr 20, 2023, 10:36 AM IST

Health Insurance: सभी लोग अपने और अपनी फामिली के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी करवाते हैं. बावजूद लोग हेल्थ पॉलिसी को इतना सीरियसली नहीं लेते. आज के समय में हेल्थ से जुड़ी गंभीर समस्याओं से बचना असंभव ही है. ऐसे समय में लोग अपनों के लिए पानी की तरह पैसा बहाते हैं. आप हेल्थ इमरजेंसी के साथ आने वाले फाइनेंशियल प्रभावों को समय रहते बहुत कम कर सकते हैं. इस समय लिवर की बीमारी हर उम्र के लोगों को अपना शिकार बना रही है. 

कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस का महत्व
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में हर साल 10 लाख लोगों में लिवर सिरोसिस से डायग्नोस्ड होते है. लिवर सिरोसिस के ट्रीटमेंट पर 10 लाख से  30 लाख रुपये तक खर्च हो सकता है. जबकि, भारत में लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च 36 लाख से रुपये से भी ज्यादा है.

इसके अलावा रिकवरी तक होने वाले तमाम खर्चे भी होते हैं. इस दौरान आर्थिक बोझ से खुद को बचाने के लिए लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों को कवर करने वाले कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस में निवेश करना सबसे बेहतर विकल्प है. हालांकि, किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस को खरीदते समय विभिन्न नीतियों की ऑनलाइन तुलना जरूर करें. 

गंभीर बीमारियों को कवर करेगी ये पॉलिसी
एक कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों, एडवांस्ड मेडिकल ट्रीटमेंट कॉस्ट और सर्जरी से संबंधित खर्च कवर करती है. इसके अलावा इसमें वेटिंग पीरियड को घटाकर 1 साल करने के लिए एक राइडर जोड़ने की फेसिलिटी मिलती है. इसके अलावा यह पॉलिसी कंज्यूमेबल्स ऐड-ऑन को जोड़ने से पॉलिसीधारक को सुई, सीरिंज, ग्लव्स आदि के खर्चों से भी राहत देगी

क्रिटिकल इलनेस प्लान
गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए क्रिटिकल इलनेस प्लान बहुत ही बेहतर ऑप्शन है. ऐसे में कंपनी डायग्नोसिस पर एक निश्चित एकमुश्त राशि अदा करती है. इसका उपयोग देश या विदेश में होने वाले मेडिकल और घरेलू खर्च, ईएमआई और किसी भी खर्च को पूरा करने के लिए किया जा सकता है.

बीमित राशि 
गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च अलग-अलग हो सकता है. बीमित राशि का सावधानीपूर्वक चयन करना जरूरी है. बढ़ते मेडिकल खर्चों के चलते 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की न्यूनतम बीमा राशि वाली पॉलिसी का विकल्प चुनने की सलाह दी जाती है. 

एक कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी केवेटिंग पीरियड के बाद आप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के खिलाफ क्लेम कर सकते हैं. ये 1 से लेकर 3 साल के बीच हो सकती है. इसे कम उम्र में खरीदने से वेटिंग पीरियड कम किया जा सकता है. 

ये एक्सपेंस भी होते हैं कवर
लगभग सभी इंश्योरेंस कंपनियां ऑर्गन डोनेशन से संबंधित खर्चों को भी कवर करती हैं.
कुछ स्कीम्स में डोनर के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों का भुगतान भी किया जाता है.

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