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जम्मू-कश्मीर में AFSPA हटने की सुगबुगाहट के बीच इन दो राज्यों में 6 महीने के लिए बढ़ा कानून

Armed Forces Special Powers Act : गृह मंत्रालय ने नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों में अफ्सपा  (AFSPA ) लागू रहने की अवधि 1 अप्रैल से अगले छह महीने के लिए बढ़ा दी है.   

AFSPA
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KIRTIKA TYAGI|Updated: Mar 28, 2024, 08:25 PM IST

Jammu and Kashmir :  लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सरकार ने अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद दोनों राज्यों के कुछ जिलों में अफस्पा AFSPA (सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम) 1 अप्रैल से अगले छह महीने के लिए बढ़ा दी है.  यह जानकारी अधिकारियों ने गुरुवार (28 मार्च ) को दी है. 

 

AFSPA को अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों और नगालैंड के आठ जिलों और कुछ अन्य क्षेत्रों में छह महीने के लिए बढ़ाया गया है. इस अधिनियम के तहत सुरक्षाबलों को विशेष अधिकार मिलते हैं. यह अशांत क्षेत्रों में लगाया जाता है.

इन 8 जिलों में बढ़ा दी अवधि 

 

नगालैंड सरकार के एक अधिकारी ने गृह मंत्रालय की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि AFSPA लागू रहने की अवधि 8 जिलों - दीमापुर, न्यूलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक और पेरेन के अलावा पांच अन्य जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों में बढ़ाई गई है. बता दें, कि नगालैंड में कुल 16 जिले हैं. 

 

गृह मंत्रालय की एक अन्य अधिसूचना में कहा गया है, कि अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ-साथ असम की सीमा से लगे नामसाई जिले के नामसाई, महादेवपुर और चौखम पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में AFSPA को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है.

 

अधिकारी ने कहा कि केंद्र ने नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है. अफ्सपा सेना, अर्धसैनिक और अन्य सुरक्षा बलों को बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने, बिना वारंट के परिसर में प्रवेश करने या तलाशी लेने के साथ-साथ कुछ अन्य कार्रवाई करने का अधिकार देता है.

 

पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा स्थिति में सुधार के साथ केंद्र ने अप्रैल 2022 में नगालैंड, असम और मणिपुर के कई क्षेत्रों में  AFSPA के तहत अशांत क्षेत्रों की संख्या कम कर दी. इसे 2015 में त्रिपुरा से और  2018 में मेघालय से और 1980 के दशक में मिजोरम से हटा लिया गया था.

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई राजनीतिक दल, गैर सरकारी संगठन और नागरिक समाज संगठन इसे पूरी तरह से रद्द करने की मांग कर रहे हैं. दिसंबर 2021 में नगालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों ने गलत पहचान" के एक मामले में 14 लोगों की हत्या और 30 अन्य के घायल होने के बाद इस मांग को तेज कर दिया था. 

 

 

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