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Hindon Flood: हिंडन से मची तबाही के बीच उठ रहे सवाल, डूब क्षेत्रों में क्यों धड़ल्ले से हो रहे निर्माण कार्य?

Hindon Flood: हिंडन नदी के किनारे डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य कराकर घनी आबादी वाले क्षेत्र विकसित करना कई सवाल खड़े कर रहा है, वहीं जब इस बारे में संबंधित अधिकारियों से पूछा गया तो वो भी स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए नजर आए.

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Hindon Flood: हिंडन से मची तबाही के बीच उठ रहे सवाल, डूब क्षेत्रों में क्यों धड़ल्ले से हो रहे निर्माण कार्य?
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Zee Media Bureau|Updated: Jul 29, 2023, 02:37 PM IST

Hindon Flood: यमुना नदी के बाद हिंडन नदी के बढ़े जलस्तर की वजह से गाजियाबाद और नोएडा में बाढ़ का सितम देखने को मिला. हिंडन नदी के किनारे बसे सभी इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए. प्रशासन द्वारा रेस्क्यू कर बाढ़ में फंसी आबादी को यहां से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ा. बाढ़ से एक ओर जहां जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, वहीं इसकी वजह को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर नदी के डूब क्षेत्रों में तेजी हो रहे निर्माण कार्यों के लिए कौन जिम्मेदार है

इंडस्ट्रियल एरिया तबाह
हिंडन नदी के बढ़े जलस्तर की वजह से इंडस्ट्रियल एरिया को काफी नुकसान हुआ है. गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी के इंडस्ट्रियल इलाकों में बाढ़ के कारण लगभग 40 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है. 

नदी के किनारे तेजी से बढ़ रही आबादी
बाढ़ का कारण कुछ भी रहा हो पर जिस तरीके से हिंडन नदी के किनारे डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य कराकर घनी आबादी वाले क्षेत्र विकसित कर दिए गए, ऐसे में नदी में आए पानी से आबादी का प्रभावित होना लाजमी है. बाढ़ से प्रभावित लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, घरों में दरारें आ गई हैं, वहीं चारों तरफ गंदगी का आलम नजर आ रहा. 

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जब बाढ़ प्रभावित लोगों से नदी के डूब क्षेत्र में रहने के बारे में बातचीत की गई तो उनका साफ तौर पर कहना था कि उन्होंने यहां रजिस्ट्री और लोन होने के बाद अपने मकान बनाए हैं. ऐसे में यदि यहां किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जाना था तो प्रशासन को पहले ही रजिस्ट्री और निर्माण कार्य पर रोक लगा देनी चाहिए थी.

जवाब देने से बचते नजर आए अधिकारी 
जब इस बारे में संबंधित अधिकारियों से पूछा गया तो वो भी स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए नजर आए. उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से हिंडन नदी में जलस्तर कम ही देखने को मिला है. साल 1978 के बाद हिंडन नदी का ऐसा रूप देखने को मिला है, जिसमें आसपास के इलाके प्रभावित हो गए. लोगों को इस बात का आभास नहीं था कि यदि नदी में कभी पानी बड़ा तो आसपास के इलाकों में बाढ़ भी आ सकती है. अब प्रशासन अपनी तरफ से जागरूकता अभियान की बात कहता हुआ नजर आ रहा है.

वहीं हिंडन को बचाने की मुहिम में जुटे हुए हिंडन बेसिल काउंसिल से जुड़े एडवोकेट संजय कश्यप के अनुसार नदी में मलवा गंदगी आदि लगातार डाले जाने के कारण नदी की जल सोखने की क्षमता लगभग खत्म हो गई है. इसके साथ-साथ डूब क्षेत्र में धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहे हैं. प्रशासन और जिम्मेदार एजेंसियां आंख बंद करके बैठी हैं. एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद उनका पालन यहां नहीं कराया गया, जिसके कारण हिंडन नदी से सटे इलाकों को बाढ़ का सितम झेलना पड़ रहा है. 

इन सभी बातों से ये स्पष्ट हो जाता है कि जिनके ऊपर जिम्मेदारी है वो अधिकारी आंख बंद करके निर्माण कार्य होने देते हैं. नदी से सटे इलाकों में जमीन सस्ती मिलने के कारण लोग शहर में अपना आशियाना बनाने का सपना आसानी से पूरा करने की चाहत रखने वाले लोग माफियाओं का शिकार हो जाते हैं. ये माफिया भोले-भाले लोगों के खून पसीने की गाढ़ी कमाई ठगकर उन्हें परेशानी और कानूनी लड़ाई झेलने के लिए छोड़ जाते हैं.

Input- Piyush Gaur 

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