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Delhi Air Quality: दिल्लीवासियों के लिए राहत भरी खबर, 9 साल में फरवरी की हवा रही सबसे स्वच्छ

Delhi-NCR Pollution: इस साल फरवरी महीने में दिल्ली की वायु गुणवत्ता 9 साल में सबसे बेहतर रही. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आकड़ों के अनुसार, इस साल फरवरी महीने के ज्यादातर दिनों में दिल्ली का AQI 200 से कम दर्ज किया गया. 

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Delhi Air Quality: दिल्लीवासियों के लिए राहत भरी खबर, 9 साल में फरवरी की हवा रही सबसे स्वच्छ
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Divya Agnihotri|Updated: Feb 29, 2024, 10:06 AM IST

Delhi-NCR Pollution: राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल्लीवासियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. इस साल फरवरी महीने में दिल्ली की वायु गुणवत्ता 9 साल में सबसे बेहतर रही. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आकड़ों के अनुसार, इस साल फरवरी महीने के ज्यादातर दिनों में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 से कम रहा. वहीं इस साल फरवरी महीने में 32.5 मिमी बारिश हुई, जो 2013 के बाद से इस महीने में सबसे अधिक है. 

पिछले 9 साल में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
साल 2016 का औसत AQI- 293 
साल 2017 का औसत AQI- 267
साल 2018 का औसत AQI- 235
साल 2019 का औसत AQI- 242
साल 2020 का औसत AQI- 240
साल 2021 का औसत AQI- 281
साल 2022 का औसत AQI- 225
साल 2023 का औसत AQI- 227
साल 2024 का औसत AQI- 223

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में दिल्ली में एक भी दिन AQI 400 से ऊपर नहीं दर्ज किया गया, जो कि 'गंभीर' श्रेणी का प्रतीक है. चार दिन ऐसे थे जब AQI 300 और 400 (बहुत खराब) के बीच था. 10 दिन AQI 200 और 300 (खराब) श्रेणी के बीच दर्ज किया गया. वहीं 28 फरवरी तक 200 (मध्यम श्रेणी) से नीचे AQI वाले 14 दिन थे.

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर
0-50 के बीच AQI अच्छा, 50-100 के बीच AQI संतोषजनक, 101-200 के बीच AQI मीडियम, 201-300 के बीच AQI खराब, 301-400 के बीच AQI बेहद खराब और 401-500 के बीच AQI गंभीर माना जाता है.

बारिश बनी वजह
साल 2013 के बाद इस साल राजधानी दिल्ली में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जो प्रदूषण कम होने की मुख्य वजह रही. दरअसल, जब बारिश होती है तो हवा में मौजूद कण उसकी ओर आकर्षित होकर जैल बना लेते हैं. हवा में मौजूद इन कणों को एरोसोल या एयर मॉल्‍यूक्‍यूल्‍स कहा जाता है, जो प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होते हैं. बारिश की बूंदों के साथ जुड़ने के बाद धरती इन्हें सोख लेती है, जिसकी वजह से प्रदूषण काफी कम हो जाता है. 

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